Wednesday, August 15, 2018

चल हट ! तू भी झूठी निकली !

तुमसे तो ऐसी उम्मीद नही थी । अरे कसम से, बिलकुल भी नही थी । सारा ज़माना झूठा साबित हो जाता , लेकिन तुम यह करोगी , ऐसा मैं सपने में भी नही सोच सकता था । अब ज़रा मेरी तरफ देखो , अरे ऐसे नही , तनिक ध्यान से देखो ।  तुम्हे कहीं भी मेरे चेहरे पर कोई तेज नज़र आता है ? अब बोलो भी ! नही है न ? फिर आखिर तुमने क्यों ऐसा इसका दिखावा कर रखा है ? अरे सेल्फी ! मैंने तो यह सोच कर तुम्हारी शरण में आया था , कि एक अदद मेरी असल सूरत , मेरे सामने आ सके । अब देखो तुमने क्या किया ? जरा चेहरे पर सफेदी देखो ! जितने लोग मुझसे व्यक्तिगत रूप से जानते हैं , सभी जानते हैं कि इस चेहरे पर ऐसी सफेदी दूर से दूर तक न
ही है । अगर लोग पीठ पीछे कालिया कह कर बुलाते हों , तो भी कोई आश्चर्य नही होना चाहिए ।
चलो अच्छा चेहरे को छोड़ो , यह जरा मेरे सर पर देखो । 75% खेती उजड़ चुकी है । यह अलग बात है कि सरकार ने मेरी इस बर्बादी के लिए आज तक कोई मुआवजा नही दिया । हालांकि इसमें मुझे अब सरकार की भी गलती नजर नही आती । वहां भी किसी ने मेरा ऐसा सेल्फीनुमा फोटो चस्पा कर दिया होगा । अच्छा चलो , उनको छोड़ो । अब तुम अपनें में ही देख लो , तुम भी मेरे बाकी बचे 25% से ही 100% का झूठा अहसास दिला रही हो । इतना सब होने के बाद मैं तुम पर कैसे भरोसा कर लूं । ना चाहते हुए भी मजबूरी में कहना ही पड रहा है । अरे ओ सेल्फी ! तुम भी औरों की तरह ही झूठी निकलीं ।  

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