Monday, August 24, 2015

महिला उत्पीडन

एनसीआरबी के 1953 से लेकर 2011 तक के अपराध के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 1971 के बाद से देश में बलात्कार की घटनाएं 873.3 फीसदी तक बढ़ी हैं। इसके अलावा उन मामलों की फेरहिस्त भी काफी लंबी है जिनकी शिकायत थाने तक पहुंची ही नहीं या पहुंचने ही नहीं दी गई। स्वयं सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि बलात्कार से पीड़ित महिला बलात्कार के बाद स्वयं अपनी नजरों में ही गिर जाती है, और जीवनभर उसे उस अपराध की सजा भुगतनी पड़ती है, जिसे उसने नहीं किया। ऐसी स्थिति में सामाजिक प्रताड़ना से इनकार नहीं किया जा सकता । उस पर आरोपियों से पहले घर-परिवार से ही दबाव बनना शुरू हो जाता है । लेकिन इस सब के बीच हैं आंकड़ों का सच, जो बताते हैं कि भारत में महिलाओं के खिलाफ़ होने वाले अपराधों के अलावा अभियुक्तों के विरुद्ध पुख्ता सबूत न होने की वजह से भी उनकी रिहाई हो जाती है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 2001 और 2010 के बीच एक लाख चालीस हज़ार से भी ज्यादा दर्ज हुए । इस तरह के मामलों में से कम से कम एक लाख ऐसे अभियुक्त थे, जिन्हें प्रमाण के अभाव में  निर्दोष करार दिया गया। मात्र 36,000 अभियुक्तों के खिलाफ ही अपराध साबित हो सके। गौर करने वाली बात ये भी है कि इस एक लाख में 14,500 से भी ज्यादा मामले ऐसे थे, जिनमे अभियुक्तों के खिलाफ नाबालिग लड़कियों का बलात्कार करने का आरोप था ।

Saturday, August 1, 2015

Nature

हमने प्रकृति के सुनिश्चित चक्र में अपने निहित स्वार्थों के लिए बदलाव के जो जाने-अनजाने प्रयास किये हैं । उसके दुष्परिणाम हमारे सामने आने लगे हैं। विकास का जो नया पैमाना बन चला है ,वो प्राकृतिक आपदाओं के लिए एक बड़ी वजह है। इंसान ने पृथ्वी के वातावरण और महासागरों के साथ जो खिलवाड़ किया है, उसकी वजह से पृथ्वी पर लगातार एक-के-बाद-एक प्राकृतिक विपत्तियाँ आ रही हैं । वह भी इतनी भयानक कि कुछ ही पलों में अनगिनत जानें चली जाती हैं , अरबों-खरबों की संपत्ति नष्ट हो जाती है । कुछ लालची लोग अपने ही दुष्कृत्यों की सजा अपने साथ साथ पृथ्वी के तमाम लोगों को दे रहे है । विशेषज्ञों का कहना है कि आए दिन तूफान, चक्रवात, बारिश, सूखा, कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में वृद्धि और दिन-ब-दिन जन्म लेती जानलेवा बीमारियां अपने वीभत्स रूप की ओर अग्रसर हैं । सबसे बड़ी बात यह है कि हम अभी भी इस दिशा में सार्थक प्रयास नहीं कर रहे है । जिससे भविष्य में हालात के और बदतर होने की ही संभावना है।