Monday, August 24, 2015
Saturday, August 1, 2015
Nature
हमने प्रकृति के सुनिश्चित चक्र में अपने निहित स्वार्थों
के लिए बदलाव के जो जाने-अनजाने प्रयास किये हैं । उसके दुष्परिणाम हमारे सामने
आने लगे हैं। विकास का जो नया पैमाना बन चला है ,वो प्राकृतिक आपदाओं के लिए एक बड़ी
वजह है। इंसान ने पृथ्वी के वातावरण और महासागरों के साथ जो खिलवाड़ किया है, उसकी वजह से पृथ्वी पर लगातार एक-के-बाद-एक प्राकृतिक विपत्तियाँ
आ रही हैं । वह भी इतनी भयानक कि कुछ ही पलों में अनगिनत जानें चली जाती हैं ,
अरबों-खरबों की संपत्ति नष्ट हो जाती है । कुछ लालची लोग अपने ही दुष्कृत्यों की
सजा अपने साथ साथ पृथ्वी के तमाम लोगों को दे रहे है । विशेषज्ञों का कहना है कि
आए दिन तूफान, चक्रवात, बारिश, सूखा, कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में वृद्धि और दिन-ब-दिन जन्म लेती जानलेवा
बीमारियां अपने वीभत्स रूप की ओर अग्रसर हैं । सबसे बड़ी बात यह है कि हम अभी भी इस
दिशा में सार्थक प्रयास नहीं कर रहे है । जिससे भविष्य में हालात के और बदतर होने की
ही संभावना है।
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