आम नागरिक और विशिष्ठ नागरिक के फ़र्क़ को समझिये भाईसाहब । कर्ज़दार है तो क्या हुआ , कोई हज़ारों वाला क़र्ज़ थोड़ी है । करोडो अरबो का क़र्ज़ घोटाले की पहली सीढ़ी बनती है । और घोटालेबाज़ सजा के नहीं मज़े के हक़दार होते हैं । अरे आप भूल गए ? आत्महत्या करना फैशन बन गया हैं । याद रखिये यही फैशनपरस्त अपना शौक पूरा करने के लिए हज़ारों में क़र्ज़ लेते हैं । अरबों के क़र्ज़ तो विशिष्टता की कसौटी होती है । इस बड़े क़र्ज़ से बहुतों का समय-असमय भला होता है । कब तक किसका मुंह कैसे बंद रखना है , और कब कितना खोलना है , सब कुछ स्क्रिप्ट के अनुसार ही होता है । पराये देश विदाई के बाद एक राष्ट्रीय चर्चा का आयोजन कुछ दिन चलेगा । उसके बाद फिर नए घोटाले की पटकथा पर काम शुरू हो जायेगा । यही दस्तूर है , यही विकास है ।
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